श्रीलंका T20I स्क्वाड: जिम्बाब्वे सीरीज से पहले हसरंगा बाहर, एशिया कप पर नजर

हसरंगा बाहर, असलंका की कप्तानी और एशिया कप का गणित

एशिया कप से ठीक पहले श्रीलंका ने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए अपनी टीम का ऐलान कर दिया है और सबसे बड़े नाम के तौर पर वानिंदु हसरंगा बाहर हैं। हसरंगा श्रीलंका के टी20 सेटअप का धुरी रहे हैं, इसलिए उनकी गैरहाजिरी ने सबका ध्यान खींचा है। बोर्ड की ओर से आधिकारिक वजह सामने नहीं आई, लेकिन टीम मैनेजमेंट का फोकस वर्कलोड मैनेजमेंट और निकट भविष्य की प्राथमिकताओं पर साफ दिख रहा है।

यह दौरा हरारे स्पोर्ट्स क्लब में हो रहा है और इसमें 2 वनडे और 3 टी20 शामिल हैं। शुरुआत रोमांचक रही है। पहले वनडे में श्रीलंका ने 298 पर बोर्ड लगाया और 7 रन से जीत निकाली, जबकि जिम्बाब्वे 291 पर आठ विकेट खोकर रुक गया। इस जीत ने मेहमान टीम का मनोबल बढ़ाया है, पर छोटे फॉर्मेट में जिम्बाब्वे अपने घर में उलटफेर करने के लिए मशहूर है।

टी20 चरण के लिए कप्तानी चरित असलंका के हाथ में है। यह उनके लिए बड़ा मौका है कि वे केवल बैटिंग नहीं, मैच-मैनेजमेंट और रोटेशन की समझ भी दिखाएं। विकेटकीपर-बल्लेबाज कुसल मेंडिस, टॉप ऑर्डर में पथुम निसांका और फ्लेक्सिबल अलराउंडर कामिंदु मेंडिस टीम का बैटिंग बैकबोन बनाते हैं। गेंदबाजी में दुष्मंथा चमीरा, असिथा फर्नांडो और दिल्शन मदुशांका की रफ्तार, जबकि स्पिन में माहिश तीक्षणा, जेफ्री वांडरसे और दునिथ वेल्लालगे अलग-अलग वैरिएशन देते हैं। यही वह कोर है जो हसरंगा की कमी को सामूहिक रूप से भरने की कोशिश करेगा।

हसरंगा की अनुपस्थिति रणनीतिक भी हो सकती है। उन्होंने पिछले वर्षों में हैमस्ट्रिंग और ओवरयूज वाली परेशानियां झेली हैं। टी20 में उनकी भूमिका केवल विकेट लेने तक सीमित नहीं रहती, वे डेथ ओवर में रन चोक भी करते हैं और लोअर ऑर्डर में तेज रन भी जोड़ते हैं। अब तीक्षणा-वेल्लालगे-वांडरसे की स्पिन तिकड़ी पर नजर रहेगी कि वे बीच के ओवरों में कितनी नियंत्रण और स्ट्राइक दे पाते हैं।

दूसरी ओर, जिम्बाब्वे इस सीरीज को 2025 पुरुष टी20 विश्व कप अफ्रीका रीजनल फाइनल की ड्रेस रिहर्सल मान रहा है। कप्तान क्रेग एर्विन फ्रेम का चेहरा हैं, जबकि सिकंदर रज़ा पिछले कुछ सालों में टीम के सबसे भरोसेमंद ऑलराउंडर रहे हैं। अनुभवी विकेटकीपर ब्रेंडन टेलर की मौजूदगी लाइन-अप को अनुभव देती है। घर की पिचें, ऊंचाई और शाम की कंडीशंस जिम्बाब्वे को बोनस देती हैं, इसलिए मेजबान टीम इस लय को क्वालिफायर से पहले पुख्ता करना चाहेगी।

सीरीज का परिदृश्य और शेड्यूल

सीरीज का परिदृश्य और शेड्यूल

हरारे स्पोर्ट्स क्लब की विकेट आमतौर पर हार्ड और सच्ची बाउंस वाली मानी जाती है, पर शाम ढलते-ढलते ग्रिप बढ़ती है और गेंद स्पिनरों को थोड़ी मदद देती है। टी20 के पावरप्ले में रन बनते हैं, लेकिन 7 से 15 ओवर के बीच स्पिनरों की रोल बढ़ती है। आउटफील्ड तेज रहती है, इसलिए एक बार गैप मिल गया तो चौका लगभग तय है। रात की ओस मैचों की दिशा बदल सकती है, इसलिए टॉस जीतने वाली टीम चेज को प्राथमिकता दे सकती है।

  • दूसरा ODI: 31 अगस्त 2025, दोपहर 1:00 बजे स्थानीय समय, हरारे स्पोर्ट्स क्लब (लगभग 4:30 बजे भारतीय समय)
  • पहला T20I: 3 सितंबर 2025, शाम 5:00 बजे स्थानीय समय (लगभग 8:30 बजे भारतीय समय)
  • दूसरा T20I: 6 सितंबर 2025, शाम 5:00 बजे स्थानीय समय (लगभग 8:30 बजे भारतीय समय)
  • तीसरा T20I: 7 सितंबर 2025, शाम 5:00 बजे स्थानीय समय (लगभग 8:30 बजे भारतीय समय)

शेड्यूल का यह पैटर्न बताए देता है कि बैक-टू-बैक गेम्स में स्क्वाड डेप्थ और रोटेशन निर्णायक होंगे। तेज गेंदबाजों पर ओवरलोडिंग से बचाने के लिए एक-दो बदलाव अक्सर देखने को मिलते हैं। स्पिनर, खासकर पावरप्ले के बाद, मैच की टेंपो सेट करते हैं।

अब बात टीमों की। मेहमानों के लिए श्रीलंका T20I स्क्वाड में जिन नामों की पुष्टि हुई है, वे रोल-क्लैरिटी के साथ आते हैं। असलंका मिडिल ऑर्डर को एंकर करेंगे, मेंडिस विकेटकीपिंग के साथ टॉप-ऑर्डर की धुरी होंगे और निसांका पावरप्ले में स्ट्राइक रेट के साथ स्थिरता का बैलेंस देंगे। कामिंदु मेंडिस परिस्थितियों के हिसाब से फ्लोट कर सकते हैं।

  • श्रीलंका के पुष्टि हुए खिलाड़ी: चरित असलंका (कप्तान), कुसल मेंडिस (विकेटकीपर), पथुम निसांका, कामिंदु मेंडिस, दुष्मंथा चमीरा, असिथा फर्नांडो, दिल्शन मदुशांका, माहिश तीक्षणा, जेफ्री वांडरसे, दुनिथ वेल्लालगे

जिम्बाब्वे अपने अनुभवी और उभरते चेहरों के कॉम्बिनेशन के साथ उतरेगा। घरेलू परिस्थितियों में एर्विन की स्टेबिलिटी और रज़ा की दोहरी भूमिका बैट और बॉल दोनों में लय तय करती है। ब्रेंडन टेलर का अनुभव, खासकर स्पिन के खिलाफ शॉट-मेकर की भूमिका में, मिडिल ओवरों को तेज कर सकता है।

  • जिम्बाब्वे के प्रमुख खिलाड़ी: क्रेग एर्विन (कप्तान), ब्रेंडन टेलर, सिकंदर रज़ा; साथ में कई अनुभवी और युवा खिलाड़ियों का मिश्रण

रणनीति की बात करें तो श्रीलंका को पावरप्ले में 45 से 55 के बीच बिना ज्यादा नुकसान के स्कोर चाहिए, ताकि मिडिल ओवरों में स्पिन के खिलाफ असलंका-कामिंदु एंकरिंग के साथ बाउंड्री ढूंढ सकें। डेथ ओवरों में मदुशांका और चमीरा के यॉर्कर व हार्ड लेंथ कारगर रहे हैं। इधर जिम्बाब्वे का लक्ष्य होगा कि वे पावरप्ले में शुरुआती विकेट लेकर मेंडिस-निसांका की जोड़ी को तोड़ें, जिससे नए बैटर को धीमा शुरू करना पड़े।

हसरंगा की गैरमौजूदगी से कप्तानी की आक्रामकता पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि वे अक्सर आक्रमणकारी फील्ड सेट और विकेट-हंटिंग स्पेल्स से मैच का फ्लो बदलते हैं। अब तीक्षणा को अधिक अटैकिंग रोल निभाना पड़ सकता है, जबकि वेल्लालगे का उपयोग बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ मिड-ओवर चोक में होगा। वांडरसे लेग-स्पिन से स्ट्राइक ऑप्शन देते हैं, जो जिम्बाब्वे के मध्यक्रम पर दबाव बना सकते हैं।

असलंका के लिए यह नेतृत्व परीक्षा है। कॉल्स जैसे समय पर गेंदबाज बदलना, बाएं-दाएं कॉम्बिनेशन तोड़ना, और डीप में सही फील्डर रखना मैच के माइक्रो-मोमेंट्स तय करेंगे। कुसल मेंडिस की विकेटकीपिंग भी स्पिन-भरी फील्ड में अहम साबित होगी, क्योंकि हरारे की पिच पर लो बाउंस और लेट टर्न स्टंपिंग के मौके बढ़ा देते हैं।

जिम्बाब्वे के नजरिए से सिकंदर रज़ा की 4 ओवर और 25-30 की तेज कैमियो बैटिंग उन्हें मैच में बनाए रखती है। एर्विन की एंकर रोल के साथ अगर टॉप-ऑर्डर 12-13वें ओवर तक सात-आठ विकेट हाथ में रखता है, तो डेथ में 45-50 रन जोड़ना मुश्किल नहीं रहता। घरेलू पेसर्स नई गेंद से उछाल निकालते हैं, और शाम होते ही कटर-स्लोअर कार्ययोजना का केंद्र बनते हैं।

हेड-टू-हेड इतिहास में श्रीलंका का पलड़ा भारी रहा है, पर जिम्बाब्वे अपने घर में क्लोज गेम्स को लंबे समय तक खींचना जानता है। यही वजह है कि टॉस, ओस और पावरप्ले के पहले छह ओवर इस सीरीज के सबसे बड़े वेरिएबल बनेंगे। श्रीलंका एशिया कप से पहले अपने बेंच की गहराई पर भरोसा परखना चाहेगा, जबकि जिम्बाब्वे अपने क्वालिफायर रोडमैप में कॉम्बिनेशन फाइनल करेगा।

एक और दिलचस्प पहलू यह है कि बैक-टू-बैक शाम के मैचों में फील्डिंग की स्टैंडर्ड भी कसौटी पर रहेगी। रात की ओस के साथ वेट बॉल पर कैचिंग और ग्राउंड फील्डिंग मुश्किल होती है। जो टीम इस हिस्से में गलती कम करेगी, उसे क्लोज फिनिश में बढ़त मिल जाएगी।

कुल मिलाकर यह सीरीज दोनों टीमों के लिए टेक्निकल और टैक्टिकल एक्सरसाइज है। श्रीलंका के लिए यह चयनकर्ताओं को संकेत देने का मौका है कि हसरंगा की गैरहाजिरी में कौन स्पिन-लीड संभाल सकता है और डेथ ओवरों में कौन भरोसेमंद है। जिम्बाब्वे के लिए यह देखने का समय है कि क्या उनका मिडिल ऑर्डर निरंतरता दिखा सकता है और क्या उनके ऑलराउंड विकल्प दबाव में संतुलन कायम रख सकते हैं।

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