संविधान दिवस पर देशभर के स्कूलों में छात्रों ने ली प्रस्तावना की शपथ

26 नवंबर 2025 को भारत के हर कोने से एक ही आवाज़ गूंजी — संविधान की प्रस्तावना। सुबह 11 बजे, देश भर के सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में छात्र और शिक्षक खड़े होकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना की शपथ लेने लगे। यह कोई सामान्य दिन नहीं था। यह वह दिन था जब 1949 को संविधान सभा ने देश के आधार को अंगीकार किया था — और 2015 से हर साल इसे याद किया जाता है। आज, लगभग 1.5 करोड़ छात्रों ने एक ही समय पर यह शपथ ली, जैसे कोई अदृश्य धागा उन्हें एक साथ बांधे हो।

संविधान की शपथ, एक देश की आवाज़

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) और शिक्षा निदेशालय ने पहले ही सभी स्कूलों को निर्देश दिए थे कि 26 नवंबर को सुबह की प्रार्थना सभा में संविधान की प्रस्तावना पढ़ी जाए। लेकिन यह बस एक आदेश नहीं था — यह एक अनुभव था। झारखंड के चाईबासा स्थित सूरजमल जैन डीएवी पब्लिक स्कूल में, प्राचार्य O.P. मिश्रा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, "यह दस्तावेज़ किसी कागज़ का ढेर नहीं। यह हर बच्चे की आज़ादी का वादा है।" उन्होंने याद दिलाया कि संविधान को तैयार करने में लगभग तीन साल लगे — 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन। और आज, इसकी प्रस्तावना को 22 भाषाओं में पढ़ने का विकल्प उपलब्ध है।

शपथ लेने का अवसर रोशनी कुमारी नाम की कक्षा नौवीं की छात्रा ने संभाला। उसने आवाज़ ऊंची की, और एक साथ सैकड़ों बच्चों ने दोहराया: "हम, भारत के नागरिक..."। उसके बाद शुभम कुमार गुप्ता ने अपने विचार साझा किए: "हम जिस देश में रहते हैं, उसकी शक्ति हमारे अधिकारों में छिपी है।" शिक्षिका सुमित्रा कुमारी ने छात्रों को संविधान के अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में एक छोटा सा प्रस्तुति दिया — जिसमें शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा शामिल थे।

देश के चारों कोनों से एक ही गीत

उत्तराखंड के हल्द्वानी के आर्डन प्रोग्रेसिव स्कूल में, छात्रों ने वंदे मातरम् का समूहगान किया — यह दिन न केवल संविधान दिवस था, बल्कि राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूर्ण होने का भी अवसर था। गाने के बाद शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि यह गीत किस तरह आज़ादी की लड़ाई में एक आवाज़ बना।

गोड्डा के पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय में, सुबह की प्रार्थना सभा की शुरुआत संविधान की शपथ से हुई। सभी छात्र, शिक्षक, सहायक कर्मचारी — हर कोई खड़ा था। कोई नहीं बैठा। छत्तीसगढ़ के एक स्कूल में, व्याख्याता डॉ. आशीष नायक ने संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया — उनकी आवाज़ में एक गहरा सम्मान था, जैसे वे किसी पवित्र ग्रंथ को पढ़ रहे हों।

राजस्थान के श्री दुंगरगढ़ और मावली में, बच्चों ने न सिर्फ शपथ ली, बल्कि अपने अधिकारों के बारे में चर्चा की। एक छात्र ने पूछा, "अगर कोई हमें अपने धर्म के नाम पर रोक दे, तो हम क्या करें?" शिक्षक ने जवाब दिया — "संविधान की धारा 25 के अनुसार, आपका अधिकार है। आप इसे न्यायालय में ला सकते हैं।" यह बात बच्चों के चेहरे पर दिखी — एक नई समझ, एक नया आत्मविश्वास।

एक जीवंत दस्तावेज़

जागरण जोश की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय संविधान चार स्तंभों पर खड़ा है: न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व। ये केवल शब्द नहीं — ये जीवन के नियम हैं। डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान अमूल्य रहा, लेकिन आज का संविधान उनका नहीं, हम सबका है। यह दस्तावेज़ अभी भी बदल रहा है — 105 संशोधनों के साथ। आज के बच्चे, जो आज शपथ ले रहे हैं, वे भविष्य में इसे फिर से बदल सकते हैं।

यह दिन किसी ऐतिहासिक घटना की याद दिलाने का नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी देने का दिन है। जब एक बच्चा संविधान की प्रस्तावना पढ़ता है, तो वह सिर्फ शब्द नहीं पढ़ रहा — वह एक नागरिक बन रहा है।

क्या आगे क्या है?

शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को इन गतिविधियों की फोटो और वीडियो को MyGov.in और constitution75.com पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। यह डिजिटल रिकॉर्ड भविष्य के इतिहासकारों के लिए एक खजाना बन जाएगा। अगले साल, जब ये बच्चे 18 साल के होंगे, तो वे वोट डालेंगे — और शायद इसी शपथ के आधार पर।

क्यों यह अहम है?

एक देश की शक्ति उसकी सेना या अर्थव्यवस्था में नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के मन में होती है। जब एक गाँव की बच्ची अपने अधिकारों के बारे में जानती है, तो वह किसी भी अन्याय को झेलने के बजाय उसका विरोध करने की हिम्मत करेगी। यही तो लोकतंत्र की असली जीत है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संविधान दिवस क्यों 26 नवंबर को मनाया जाता है?

26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा ने संविधान को अंगीकार किया था। यह दिन उस ऐतिहासिक घटना को याद करता है जिसमें भारत ने अपने नागरिकों के लिए एक लोकतांत्रिक ढांचा तैयार किया। 2015 में सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर मनाने का फैसला किया।

प्रस्तावना की शपथ क्यों ली जाती है?

शपथ लेने से बच्चों को संविधान की भावना समझने में मदद मिलती है। यह केवल एक रिमाइंडर नहीं, बल्कि एक वादा है — न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के लिए खड़े रहने का। यह भविष्य के नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करता है।

22 भाषाओं में प्रस्तावना क्यों उपलब्ध है?

भारत एक भाषाई विविधता वाला देश है। 22 भाषाओं में प्रस्तावना उपलब्ध कराने से हर बच्चा, चाहे वह हिंदी, तमिल, बंगाली या मराठी बोले, अपनी मातृभाषा में संविधान को समझ सकता है। यह एकता का प्रतीक है — एक दस्तावेज, अनेक आवाज़ें।

डॉ. अंबेडकर का संविधान में क्या योगदान था?

डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। उन्होंने शोषण के खिलाफ संरक्षण, धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों को दस्तावेज में शामिल किया। उनका दृष्टिकोण न केवल राजनीतिक बल्कि सामाजिक न्याय पर आधारित था — जो आज भी संविधान की रूह है।

संविधान के अधिकार और कर्तव्य में क्या अंतर है?

अधिकार वे हैं जिनका आप उपयोग कर सकते हैं — जैसे धार्मिक स्वतंत्रता या न्याय का अधिकार। कर्तव्य वे हैं जिन्हें आपको पालन करना चाहिए — जैसे संविधान का पालन, राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना या देश की एकता बनाए रखना। एक नागरिक दोनों के बीच संतुलन बनाता है।

स्कूलों को MyGov.in पर वीडियो क्यों अपलोड करना है?

यह एक जागरूकता अभियान है। वीडियो देश भर के शिक्षकों, अभिभावकों और अन्य स्कूलों के लिए एक मॉडल बनते हैं। यह दिखाता है कि संविधान की शिक्षा केवल पाठ्यचर्या नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है। यह डिजिटल रिकॉर्ड भविष्य के शिक्षा नीतियों के लिए भी आधार बनेगा।

3 टिप्पणि

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    Abhinav Rawat

    नवंबर 28, 2025 AT 10:00

    ये दिन सिर्फ एक डिजिटल रिकॉर्ड या स्कूली शपथ नहीं है। ये तो एक जीवंत अनुभव है जो हर बच्चे के अंदर एक नागरिक के रूप में जागृति लाता है। जब एक गाँव की लड़की अपनी मातृभाषा में 'समानता' और 'बंधुत्व' का उच्चारण करती है, तो वो केवल शब्द नहीं, बल्कि एक अधिकार का अनुभव कर रही होती है। ये वो चीज है जो पाठ्यक्रम में नहीं, बल्कि दिलों में उतरती है। संविधान एक कागज़ नहीं, एक जीवन शैली है। और जब एक बच्चा इसे शपथ के रूप में लेता है, तो वो अपने भविष्य को नहीं, बल्कि देश के भविष्य को शपथ दे रहा होता है। इस तरह की गतिविधियाँ ही लोकतंत्र को जीवित रखती हैं - न कि सैन्य शक्ति या आर्थिक विकास।

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    Shashi Singh

    नवंबर 29, 2025 AT 06:15

    ये सब एक बड़ा धोखा है!! अब तक किसी ने नहीं बताया कि इस प्रस्तावना को किसने लिखा? क्या आप जानते हैं कि अंबेडकर को असल में उनके दल के लोगों ने धोखा दिया था? और ये स्कूलों में शपथ लेने का नाटक? ये तो सिर्फ एक राष्ट्रीय प्रचार है! जब तक हमारे स्कूलों में अंग्रेजी शिक्षा नहीं बंद हो जाती, तब तक ये सब बकवास है! और ये MyGov.in पर वीडियो अपलोड करने का दबाव? ये तो सरकारी निगरानी है!!

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    Surbhi Kanda

    नवंबर 30, 2025 AT 02:10

    यह एक अत्यंत संरचित नागरिक शिक्षा अभियान है जिसमें शिक्षा निदेशालय के निर्देशों के साथ-साथ शिक्षकों के अधिकारों का भी सम्मान किया गया है। यह एक नियमित निर्देशित अनुभव के रूप में डिज़ाइन किया गया है जिसमें प्रस्तावना के अध्ययन के साथ-साथ नागरिक जागरूकता के तत्वों का समावेश है। इसके तहत अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन को बनाए रखने का एक स्पष्ट शिक्षाविज्ञान वाला दृष्टिकोण अपनाया गया है।

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